Monday, 12 October 2015

गला और छाती की बीमारी का इलाज ::
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गले में किनती भी ख़राब से ख़राब बीमारी हो, कोई भी इन्फेक्शन हो, इसकी सबसे अच्छा दावा है हल्दी । जैसे गले में दर्द है, खरास है , गले में खासी है, गले में कफ जमा है, गले में टोनसीलाईटिस हो गया ; ये सब बिमारिओं में आधा चम्मच कच्ची हल्दी का रस लेना और मुह खोल कर गले में डाल देना , और फिर थोड़ी देर में ये हल्दी गले में निचे उतर जाएगी लार के साथ ; और एक खुराक में ही सब बीमारी ठीक होगी दुबारा डालने की जरुरत नही ।
ये छोटे बच्चो को तो जरुर करना ; बच्चो के टोन्सिल जब बहुत तकलीफ देते है न तो हम ऑपरेशन करवाके उनको कटवाते है ; वो करने की जरुरत नही है हल्दी से सब ठीक होता है ।
गले और छाती से जुडी हुई कुछ बीमारिया है जैसे खासी ; इसका एक इलाज तो कच्ची हल्दी का रस है जो गले में डालने से तुतंत ठीक हो जाती है चाहे कितनी भी जोर की खासी हो । दूसरी दावा है अदरक , ये जो अदरक है इसका छोटा सा टुकड़ा मुह में रखलो और टफी की तरह चुसो खासी तुतंत बंध हो जाएगी ।
अगर किसीको खासते खासते चेहरा लाल पड़ गया हो तो अदरक का रस ले लो और उसमे थोड़ा पान का रस मिला लो दोनों एक एक चम्मच और उसमे मिलाना थोड़ा सा गुड या सेहद । अब इसको थोडा गरम करके पी लेना तो जिसको खासते खासते चेहरा लाल पड़ा है उसकी खासी एक मिनट में बंध हो जाएगी ।
और एक अच्छी दावा है , अनार का रस गरम करके पियो तो खासी तुरन्त ठीक होती है । काली मिर्च है गोल मिर्च इसको मुह में रख के चबालो , पीछे से गरम पानी पी लो तो खासी बंध हो जाएगी, काली मिर्च को चुसो तो भी खासी बंध हो जाती है ।
छाती की कुछ बिमारिया जैसे दमा, अस्थमा, ब्रोंकिओल अस्थमा, इन तीनो बीमारी का सबसे अच्छा दवा है गाय मूत्र ; आधा कप गोमूत्र पियो सबेरे का ताजा ताजा तो दमा ठीक होता है, अस्थमा ठीक होता है, ब्रोंकिओल अस्थमा ठीक होता है ।
और गोमूत्र पिने से टीबी भी ठीक हो जाता है , लगातार पांच छे महीने पीना पड़ता है । दमा अस्थमा का और एक अच्छी दवा है दालचीनी, इसका पाउडर रोज सुबह आधे चम्मच खाली पेट गुड या शहद मिलाके गरम पानी के साथ लेने से दमा अस्थमा ठीक कर देती है।

Thursday, 8 October 2015

आंवले के प्रयोग ::
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वमन (उल्टी) : -* हिचकी तथा उल्टी में आंवले का 10-20 मिलीलीटर रस, 5-10 ग्राम मिश्री मिलाकर देने से आराम होता है। इसे दिन में 2-3 बार लेना चाहिए। केवल इसका चूर्ण 10-50 ग्राम की मात्रा में पानी के साथ भी दिया जा सकता है।


* त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) से पैदा होने वाली उल्टी में आंवला तथा अंगूर को पीसकर 40 ग्राम खांड, 40 ग्राम शहद और 150 ग्राम जल मिलाकर कपड़े से छानकर पीना चाहिए।
* आंवले के 20 ग्राम रस में एक चम्मच मधु और 10 ग्राम सफेद चंदन का चूर्ण मिलाकर पिलाने से वमन (उल्टी) बंद होती है।
* आंवले के रस में पिप्पली का बारीक चूर्ण और थोड़ा सा शहद मिलाकर चाटने से उल्टी आने के रोग में लाभ होता है।
* आंवला और चंदन का चूर्ण बराबर मात्रा में लेकर 1-1 चम्मच चूर्ण दिन में 3 बार शक्कर और शहद के साथ चाटने से गर्मी की वजह से होने वाली उल्टी बंद हो जाती है।
* आंवले का फल खाने या उसके पेड़ की छाल और पत्तों के काढ़े को 40 ग्राम सुबह और शाम पीने से गर्मी की उल्टी और दस्त बंद हो जाते हैं।
* आंवले के रस में शहद और 10 ग्राम सफेद चंदन का बुरादा मिलाकर चाटने से उल्टी आना बंद हो जाती है।
संग्रहणी : -मेथी दाना के साथ इसके पत्तों का काढ़ा बनाकर 10 से 20 ग्राम की मात्रा में दिन में 2 बार पिलाने से संग्रहणी मिट जाती है।
"मूत्रकृच्छ (पेशाब में कष्ट या जलन होने पर) : -* आंवले की ताजी छाल के 10-20 ग्राम रस में दो ग्राम हल्दी और दस ग्राम शहद मिलाकर सुबह-शाम पिलाने से मूत्रकृच्छ मिटता है।
* आंवले के 20 ग्राम रस में इलायची का चूर्ण डालकर दिन में 2-3 बार पीने से मूत्रकृच्छ मिटता है।
विरेचन (दस्त कराना) : -रक्त पित्त रोग में, विशेषकर जिन रोगियों को विरेचन कराना हो, उनके लिए आंवले के 20-40 मिलीलीटर रस में पर्याप्त मात्रा में शहद और चीनी को मिलाकर सेवन कराना चाहिए।
अर्श (बवासीर) : -* आंवलों को अच्छी तरह से पीसकर एक मिट्टी के बरतन में लेप कर देना चाहिए। फिर उस बरर्तन में छाछ भरकर उस छाछ को रोगी को पिलाने से बवासीर में लाभ होता है।
* बवासीर के मस्सों से अधिक खून के बहने में 3 से 8 ग्राम आंवले के चूर्ण का सेवन दही की मलाई के साथ दिन में 2-3 बार करना चाहिए।
* सूखे आंवलों का चूर्ण 20 ग्राम लेकर 250 ग्राम पानी में मिलाकर मिट्टी के बर्तन में रात भर भिगोकर रखें। दूसरे दिन सुबह उसे हाथों से मलकर छान लें तथा छने हुए पानी में 5 ग्राम चिरचिटा की जड़ का चूर्ण और 50 ग्राम मिश्री मिलाकर पीयें। इसको पीने से बवासीर कुछ दिनों में ही ठीक हो जाती है और मस्से सूखकर गिर जाते हैं।
* सूखे आंवले को बारीक पीसकर प्रतिदिन सुबह-शाम 1 चम्मच दूध या छाछ में मिलाकर पीने से खूनी बवासीर ठीक होती है।
* आंवले का बारीक चूर्ण 1 चम्मच, 1 कप मट्ठे के साथ 3 बार लें।
* आंवले का चूर्ण एक चम्मच दही या मलाई के साथ दिन में तीन बार खायें।
शुक्रमेह : -धूप में सुखाए हुए गुठली रहित आंवले के 10 ग्राम चूर्ण में दुगनी मात्रा में मिश्री मिला लें। इसे 250 ग्राम तक ताजे जल के साथ 15 दिन तक लगातार सेवन करने से स्वप्नदोष (नाइटफॉल), शुक्रमेह आदि रोगों में निश्चित रूप से लाभ होता है।
खूनी अतिसार (रक्तातिसार) : -यदि दस्त के साथ अधिक खून निकलता हो तो आंवले के 10-20 ग्राम रस में 10 ग्राम शहद और 5 ग्राम घी मिलाकर रोगी को पिलायें और ऊपर से बकरी का दूध 100 ग्राम तक दिन में 3 बार पिलाएं।
रक्तगुल्म (खून की गांठे) : -आंवले के रस में कालीमिर्च डालकर पीने से रक्तगुल्म खत्म हो जाता है।
प्रमेह (वीर्य विकार) : -* आंवला, हरड़, बहेड़ा, नागर-मोथा, दारू-हल्दी, देवदारू इन सबको समान मात्रा में लेकर इनका काढ़ा बनाकर 10-20 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम प्रमेह के रोगी को पिला दें।
* आंवला, गिलोय, नीम की छाल, परवल की पत्ती को बराबर-बराबर 50 ग्राम की मात्रा में लेकर आधा किलो पानी में रातभर भिगो दें। इसे सुबह उबालें, उबलते-उबलते जब यह चौथाई मात्रा में शेष बचे तो इसमें 2 चम्मच शहद मिलाकर दिन में 3 बार सेवन करने से पित्तज प्रमेह नष्ट होती है।
पित्तदोष : -आंवले का रस, शहद, गाय का घी इन सभी को बराबर मात्रा में लेकर आपस में घोटकर लेने से पित्त दोष तथा रक्त विकार के कारण नेत्र रोग ठीक होते हैं|

Wednesday, 7 October 2015

छुई मुई ( लाजवंती ) से मर्दाना इलाज ::~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

छुई-मुई के पौधे को अगर कोई छू ले तो उसकी पत्तियां शरमाकर सिकुड़ जाती हैं। अपने इस स्वभाव की वजह से इसे शर्मीली के नाम से भी जाना जाता है। शर्मीले स्वभाव के इस पौधे में जिस तरह के औषधीय गुण हैं, छुई-मुई को जहां एक ओर देहातों में लाजवंती या शर्मीली के नाम से जाना जाता है। वहीं, इसका वानस्पतिक नाम माईमोसा पुदिका है। संपूर्ण भारत में होने वाला यह पौधा अनेक रोगों के निवारण के लिए उपयोग में लाया जाता है। 
-- छुई-मुई की जड़ों और बीजों का चूर्ण दूध के साथ लेने से पुरुषों में वीर्य की कमी की शिकायत में काफी हद तक फायदा होता है। इसकी जड़ों और बीजों का चूर्ण दूध के साथ लेने से पुरुषों में वीर्य की कमी की शिकायत में काफी हद तक फायदा होता है। इसकी जड़ों और बीजों के चूर्ण की 4 ग्राम मात्रा हर रात एक गिलास दूध के साथ एक माह तक लगातार ले।
--- छुई-मुई और अश्वगंधा की जड़ों की समान मात्रा लेकर पीस लिया जाए और तैयार लेप को ढीले स्तनों पर हल्के-हल्के मालिश किया जाए तो धीरे-धीरे ढीलापन दूर होता है।
---छुई-मुई के बीजों के चूर्ण (3 ग्राम) को दूध के साथ मिलाकर रोजाना रात को सोने से पहले लिया जाए तो शारीरिक दुर्बलता दूर हो जाती है।
---छुई-मुई का पौधा घावों को जल्द से जल्द ठीक करने में बहुत ज्यादा सक्षम होता है। इसकी जड़ों का 2 ग्राम चूर्ण दिन में तीन बार गुनगुने पानी के साथ लिया जाए तो आंतरिक घाव जल्द ठीक होने लगते हैं।
--हड्डियों के टूटने और मांस-पेशियों के आंतरिक घावों के उपचार में छुई-मुई की जड़ें काफी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती हैं। घावों को जल्दी ठीक करने में इसकी जड़ें सक्रियता से कार्य करती हैं।
-- छुई-मुई के पत्तों को पानी में पीसकर नाभि के निचले हिस्से में लेप करने से पेशाब का अधिक आना बंद हो जाता है। पत्तियों के रस की 4 चम्मच मात्रा दिन में एक बार लेने से भी फायदा होता है।
--- छुई-मुई की जड़ और पत्तों का पाउडर दूध में मिलाकर दो बार लेने से बवासीर और भगंदर रोग ठीक होता है। पत्तियों के रस को बवासीर के घाव पर सीधे लगाने से घाव जल्दी सुख जाता है और अक्सर होने वाले खून के बहाव को रोकने में भी मदद करता है।
-- छुई-मुई की जड़ों का चूर्ण (3 ग्राम) दही के साथ खूनी दस्त में जड़ों का पानी में तैयार काढ़ा भी खूनी दस्त रोकने में कारगर होता है।
-- छुई-मुई के पत्तों का 1 चम्मच पाउडर मक्खन के साथ मिलाकर भगंदर और बवासीर होने पर घाव पर रोज सुबह-शाम या दिन में 3 बार लगाने से ठीक हो जाता है |
-- यदि छुई-मुई की 100 ग्राम पत्तियों को 300 मिली पानी में डालकर काढ़ा बनाया जाए और इसे डायबिटीज रोगी को दिया जाए तो डायबिटीज में काफी फायदा होता है।

दमा (श्वास रोग) अस्थमा-
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साँस लेने में दिक्कत या कठिनाई महसूस होने को श्वास रोग कहते हैं । फेफड़ों की नलियों की छोटी-छोटी पेशियों में जब अकड़न युक्त संकुचन उत्पन्न होता है तो फेफड़ा, साँस को पूरी तरह अंदर अवशोषित नहीं कर पाता है जिससे रोगी पूरा श्वास खींचे बिना ही श्वास छोड़ने को विवश हो जाता है । इसी स्थिति को दमा या श्वास रोग कहते हैं ।
दमा को पूर्ण रूप से ठीक करने हेतु प्राणायाम का अभ्यास सर्वोत्तम है ।
विभिन्न औषधियों से दमे का उपचार :-
--- अदरक के रस में शहद मिलाकर चाटने से श्वास , खांसी व जुक़ाम में लाभ होता है ।
--- प्याज़ का रस , अदरक का रस , तुलसी के पत्तों का रस व शहद ३-३ ग्राम की मात्रा में लेकर सुबह-शाम सेवन करने से अस्थमा रोग नष्ट होता है ।
--- काली मिर्च – २० ग्राम , बादाम की गिरी – १०० ग्राम और खाण्ड – ५० ग्राम लें | तीनों को अलग – अलग बारीक़ पीस कर चूर्ण बना लें , फिर तीनों को अच्छी तरह से मिला लें | इस मिश्रण की एक चम्मच लें और रात को सोते समय गर्म दूध से लें , लाभ होगा ।
विशेष :- जिनको मधुमेह हो वे खाण्ड का प्रयोग न करें तथा जिनको अम्लपित्त [acidity ] हो वे काली मिर्च १० ग्राम की मात्रा में प्रयोग करें।
--- आधा कप काफी दिन में ३ बार लेवे जिस से अस्थमा नियंत्रित रहेगा |
---लहसुन दमा के इलाज में काफी कारगर साबित होता है। 30 मिली दूध में लहसुन की पांच कलियां उबालें और इस मिश्रण का हर रोज सेवन करने से दमे में शुरुआती अवस्था में काफी फायदा मिलता है।
---अदरक की गरम चाय में लहसुन की दो पिसी कलियां मिलाकर पीने से भी अस्थमा नियंत्रित रहता है। सबेरे और शाम इस चाय का सेवन करने से मरीज को फायदा होता है।
---दमा रोगी पानी में अजवाइन मिलाकर इसे उबालें और पानी से उठती भाप लें, यह घरेलू उपाय काफी फायदेमंद होता है। 4-5 लौंग लें और 125 मिली पानी में 5 मिनट तक उबालें। इस मिश्रण को छानकर इसमें एक चम्मच शुद्ध शहद मिलाएँ और गरम-गरम पी लें। हर रोज दो से तीन बार यह काढ़ा बनाकर पीने से मरीज को निश्चित रूप से लाभ होता है।
---180 मिमी पानी में मुट्ठीभर सहजन की पत्तियां मिलाकर करीब 5 मिनट तक उबालें। मिश्रण को ठंडा होने दें, उसमें चुटकीभर नमक, कालीमिर्च और नीबू रस भी मिलाया जा सकता है। इस सूप का नियमित रूप से इस्तेमाल दमा उपचार में कारगर माना गया है।
---अदरक का एक चम्मच ताजा रस, एक कप मैथी के काढ़े और स्वादानुसार शहद इस मिश्रण में मिलाएं। दमे के मरीजों के लिए यह मिश्रण लाजवाब साबित होता है। मैथी का काढ़ा तैयार करने के लिए एक चम्मच मैथीदाना और एक कप पानी उबालें। हर रोज सबेरे-शाम इस मिश्रण का सेवन करने से निश्चित लाभ मिलता है।

Thursday, 1 October 2015

खून साफ करने के लिए ::
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सामग्री::
किशमिश munkka 100 ग्राम ( बीज निकाल लेवे )
गिलोय सत्व पाउडर महीन पिसा हुआ 100 ग्राम
दोनों लेकर ठीक से पीस के पेस्ट बना लेवे |
सेवन विधि- इस मिश्रण का एक एक चम्मच दिन में दो बार प्रातः सायं चबा-चबा कर धीरे धीरे खाएं. कम से कम आधे घंटे पानी न पियें. मधुमेह के रोगी अपने चिकित्सक से पूछकर प्रयोग करें
लाभ-
(1) यह प्रयोग स्त्रियों के गर्भाशय को क्लीन करता है और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकाल फेकता है. मासिक चक्र नियमित होता है. गर्भाशय की बड़ी समस्याओं में भी अन्य दवाओं के साथ सहायक फ़ूड रेमेडी की तरह ले सकते हैं|
(2) इसका नियमित इस्तेमाल पिम्पल आदि दूर करके त्वचा को सुन्दर बनाता है त्वचा और रक्तचाप की समस्याओं में भी उपयोगी है और ह्रदय को मजबूती प्रदान करता है.
(3)यह खून की कमी को दूर करने में भी उपयोगी है इसके सेवन से हाथ पैरों में होने वाली जलन शांत होती है. लगातार बन रहने वाला हल्का बुखार भी धीरे धीरे चला जाता है|
मुन्नका किराणे की शॉप में मिल जाएगी , और गिलोय सत्व पतंजलि शॉप में अच्छी और गुणवता वाली मिल जाएगी |

हिलते दांतों के लिए घरेलू उपाय ::
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दांतों की ढीलापन आमतौर पर पैरीयोडोंटम नामक बीमारी के कारण होता है। यह मसूड़ों के कारण होता है, जो दांत के आसपास के ऊतकों को प्रभावित करता है। इस बीमारी में दांतों से जुड़े मुलायम फाइब्रस टिश्‍यू, जो अंदर से हड्डी से कनेक्‍ट होते हैं, ज्‍यादा मुलायम हो जाते हैं। जिससे दांतों में हिलने की समस्‍या होने लगती है। यह समस्‍या दांतों को बहुत ज्‍यादा रगड़ने, गम क्‍लीनिंग, उम्र बढ़ने, मौखिक स्वच्छता की कमी, मसूड़ों के जीवाणु संक्रमण के कारण हो सकती है।
१..
काली मिर्च और हल्‍दी का पेस्ट --
इन दोनों मसालों के मिश्रण से मसूड़ों को मजबूत बनाया जाता है। समस्‍या होने पर काली मिर्च और हल्‍दी की जड़ को पीसकर, उसका गाढ़ा सा पेस्‍ट बनाना लें। इस पेस्‍ट को हिलते दांत वाली जगह पर 30 मिनट के लिए लगाकर छोड़ दें। या फिर दो से तीन मिनट अपने दांतों में इस पेस्‍ट से मसाज करें। इस उपाय से दांतों के हिलने के साथ-साथ दांतों का दर्द भी दूर हो जाएगा। समस्‍या दूर होने तक इस उपाय को नियमित रूप से करें।
२..
पुदीने का तेल
पुदीने के तेल में दांतों की समस्‍याओं को दूर करने वाले एंटीबैक्‍टीरियल और एंटीमाइक्रोबैक्‍टीरियल गुण होते हैं। यह दांतों के हिलने की समस्‍या को भी दूर करने में आपकी मदद करता है। तेल को उंगली में लेकर हिलते दांत पर अच्‍छे से लगाकर मसाज करें। इसके अलावा राहत पाने के लिए तेल को पानी में मिलाकर इसे कुल्‍ला करने के लिए भी इस्‍तेमाल कर सकते हैं।
३..
सरसों का तेल और नमक
प्राचीन काल से ही दांतों को जड़ से मजबूत करने के लिए सरसों के तेल में नमक मिलाकर प्रयोग किया जाता है। नियमित रूप से सुबह उठकर नमक और सरसों का तेल मिलाकर इससे दांत साफ करें और दर्द वाली जगह पर इस पेस्‍ट को लगाकर हल्‍के हाथों से मसाज करें। इस उपाय से आपको जल्‍द ही आराम मिलने लगेगा।
४..
आंवला
आंवला अपने कई लाभकारी गुणों के लिए जाना जाता है। विशेषकर इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी की मौजूदगी दांतो की पकड़ को मजबूत करती है। साथ ही यह संयोजी ऊतक को ठीक होने में मदद करता है। हिलते दांत में आवंला जूस काफी आराम देता है। आप चाहें तो आंवला रस से कुल्‍ला कर लें या इसे पी लें।
५...
लौंग के तेल के प्रयोग
लौंग का तेल मसूड़ों की सूजन और दांत दर्द को नियंत्रित करने का बहुत ही अच्‍छा प्राकृतिक उपचार है। लौंग के तेल का उपयोग पुदीना तेल के समान होता है। सूजन को नियंत्रित करने और राहत पाने के लिए इसका इस्‍तेमाल प्रभावित क्षेत्र पर मसाज करने के लिए किया जाता है। अगर दांत ज्‍यादा हिलते हैं तो लौंग तेल को हिलते दांत पर लगाएं और मसाज करें। या रात को लगाकर छोड़ दें। इससे काफी राहत मिलती है।
६..
अजवायन की पत्तियों का तेल
आजवाइन की पत्‍ती का तेल, हिलते दांत में काफी फायदेमंद होता है। इसे दांतों पर लगाकर हल्‍के हाथों से मसाज करें। इससे दांतों को गर्मी मिलती है और हिलते दांत में राहत हो जाती है। इसके अलावा सूजन और दर्दनाक मसूड़ों के लिए आप अजवायन की पत्तियों का सहारा ले सकते हैं। ये सूजन को कम करने में मदद कर आपको राहत प्रदान करता है।
७...
नमक का प्रयोग करें
नमक मौखिक स्वास्थ्य से लिए बहुत ही लाभकारी होता है। इसमें मौजूद सौम्य एंटीसेप्टिक गुणों के कारण यह मुंह में होने वाले संक्रमण से राहत देने में मदद करता है। समस्‍या होने पर एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्‍मच नमक डालकर, इस पानी से मुंह में कुल्ला करें। या सूजन को कम करने के लिए गम पर मालिश करें। इससे दांतों के सारे जर्म मर जाएंगे और आपका मुंह एकदम साफ हो जाएगा।

गंधक रसायन -यौवन दाता :

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यौवन एक एसा विषय है जिसे कौन नही पाना चाहता है और फिर बात अगर सदाबहार यौवन की की जाए तो मै समझता हूँ कि वृद्ध भी सोचने लगेंगे कि भाई अगर यह मिल जाए तो है वैद्य तुम्हारा अति भला हो।लैकिन सौभाग्य से भारत में ऐसे योगों की कमी नही है कमी हो रही है तो जानने बालों की जिसके चलते आज आयुर्वेद का ज्ञान क्षीण प्राय हो चला है।
भाईयो आयुर्वेद ऐसा चिकित्सा भण्डार है जो अकेला आपकी चिकित्सा की ही नही आपको निरोगी बनाने की गारंटी भी लेता है।
आंवलसार गंधक व सूखा आंवला 50-50 ग्राम अलग अलग चूर्ण ले तथा मिला लें।आजकल आंवले आ रहे है तो ताजा आंवलों का रस तथा सेमल की मूसली को लेकर उसका भी रस निकाल लें तथा पहले बताऐ गये चूर्ण को इनमे अलग अलग भिगोकर 7-7 बार सुखा लें या आयुर्वेदिक भाषा में कहें तो भावना दे लें।
बस बन गया आपका आयुर्वेदिक सदाबहार यौवन दाता योग जो आपके शरीर को पुनर्यौवन प्रदान करने की शक्ति रखता है।
कम से कम तीन महिने इस योग को केवल एक ग्राम की मात्रा में लेकर मिश्री के साथ सेवन करने से वृद्ध व्यक्ति भी यौवन से झरझरा उठेगा।यह योग अत्यन्त यौवन शक्ति दाता योग है।

योनी रोग और उपचार ::
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योनि की सूजन
हम जानते हैं कि सफाई न होना अनेक रोगों का कारण बनता है फिर योनि की सफाई न करने से दुष्प्रभाव होना अवश्यम्भावी ही है ।तो यही सफाई न करना कभी कभी स्त्रियों को भारी पड़ जाता है। वैसे सफाई के अलावा पाचन में गड़वड़ी,मधुमेह या डाईविटीज का होना,योनि में खुजली आदि भी इसके कारणों में से हैं।कभी कभी प्रथम संभोग के कारण से भी यह रोग पैदा हो सकता है किन्तु ऐसा कभी कभी ही होता है लेकिन कभी कभी जब शरीर में रक्त पतला हो जाता है तब भी योनि में सूजन हो सकती है।
इस रोग में योनि द्वार व उसके दोनों ओष्ठों में सूजन हो जाती है।और इस सूजन के कारण योनि के आसपास की त्वचा लाल होकर यहाँ क्षोभ के कारण यहाँ दर्द हो जाता है।और अगर यह सूजन बढ़ जाऐ तो बुखार हो सकता है।तथा सूजन के कारण ही चलने फिरने में भी प्रोब्लम हो सकती है।
रोगोपचार- यह रोग पैदा होता है सफाई न होने से तो पहले नम्बर पर सफाई रखा करें इसके अलाबा इस रोग का कारण है पेट में कब्ज बना रहना तो रोग का इलाज करने से पहले कब्ज का निवारण करें। और पेट साफ होने पर या दवा के साथ ही इस रोग की दवा भी करें।
पोस्त या खसखस के डोडे,सूखी मकोय,व नीम के पत्ते 10-10ग्रा. लेकर सभी को 1 लीटर पानी में उबाल लें और छान लें इसी पानी से रुई लेकर गुन गुना होने पर ही अपनी योनि को सेके इससे योनि की सूजन में निस्चित ही कमी होगी।

योनिगत घाव
शोथ या सूजन युक्त योनि में चलने से रगड़ पैदा होने जाती है फलस्वरुप योनि में घाव पैदा हो जाते हैं।कभी कभी योनि में गर्मी से फुंसियाँ भी पैदा हो जाती हैं तथा कभी कभी सूजन ज्यादा होने पर योनि की इसी सूजन में मवाद पड़ जाता है।और कभी कभी योनि से एक विशेष प्रकार की बदबू पैदा हो जाती है।और इसी के कारण या अन्य गुप्त रोग जैसे उपदंश या सुजाक के कारण भी योनि की त्वचा छिल जाती है औऱ योनि में घाव पैदा हो जाते हैं।
रोगोपचार - सामान्य रोगावस्था में नीम की पत्तियों को उबालकर ही योनि को धो लेने से रोग मुक्ति मिल जाती है।
इसके अलावा यह मलहम घर पर बना लेवे --
50 ग्राम तिल तेल मे10 ग्राम नीम व 10 ग्राम ही मेहंदी के पत्ते अच्छी तरह पकाकर (जब पत्ते जल जाऐं ) तब तेल को छान लेवें और इसी में 10 ग्राम मोम पिघला लें ।इस मिश्रण में अलग से 12 ग्राम कबीला,4 ग्राम मुर्दासंग और काशरी खरल करके मिला लें। मलहम तैयार है।
इस मलहम से अन्दरुनी हिस्सों के सभी घाव भर जाते हैं।

काम शक्ति बढ़ाये - सालम पंजा /मिश्री ::
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इसे हिन्दी व बंगाली,फारसी आदि भाषाओं में भी सालव मिश्री कहा जाता है।अपभ्रंस रुप में बहुत लोग इसे सालब मिश्री या सालभ मिश्री भी कहा जाता है यह आसानी से किराने की दवा वेचने वालों के यहाँ आसानी से मिल जाती है। इस औषधि का प्रजनन संस्थान पर भी विशेष प्रभाव पड़ता है और इसे इसी कारण प्रजनन संस्थान संबंधी योगों में प्रयोग किया जाता है।
वीर्य को पुष्ट कर शरीर को शक्तिशाली बनाता है।बहुत से लोग जो शीघ्रपतन से ग्रस्त हैं और इस कारण स्त्री के सामने उन्हैं लज्जित होने की स्थिति बन जाती है यह सालम मिश्री या सालम पंजा एसे लोगों को वडा़ ही लाभकारी औषधि द्रव्य है।
इसके अलावा यह केवल पुरुष रोगों में ही नही यह स्त्रियों के प्रदर रोग व इनके कारण उत्पन्न दुर्वलता आदि दूर करने के लिए भी यह उत्तम औषधि रत्न है।
सलाम पाक भी बना बनाया मिलता है |
एक चमच सुबह शाम दूध से लेवे |

पसली दर्द निवारण ::```````````````````````

----उत्तम साबुन, कपूर और दालचीनी का तेल लेकर मलहम बनाएँ। 
पहले साबुन लेकर चाकू से बारीक-बारीक छिलके उतारें। इस प्रकार 50 ग्राम साबुन के छिलके उतारें और उन्हें खरल में डालकर आश्यकतानुसार दाल चीनी का तेल डालकर घुटाई करें। जैसे-जैसे द्रवत्व सूखे, वैसे-वैसे और तारपीन का तेल डालते हुए घुटाई करते रहें।
घोंटते-घोंटते साबुन का अंश दालचीनी के तेल में मिलकर मलहम जैसा बन जाना चाहिए अर्थात साबुन का विलय तेल में पूर्ण रूप से हो जाना चाहिए। इसके बाद 10 ग्राम कपूर डालकर पुनः घुटाई करें और फिर शीशी में भरकर रख लें।
न्यूमोनिया में होने वाले पसली के दर्द में इसे थोड़ा सा लगाकर अच्छी तरह सेंक करें। इससे कैसा भी दर्द हो, तुरंत बंद हो जाता है। इसके अतिरिक्त शरीर के किसी भी अंग में दर्द हो, इसे लगाकर मालिश करने से शीघ्र आराम मिलता है। साधारण दर्द हो तो केवल लगाकर मालिश कर धूप में बैठने से ही आराम मिलता है।
-----गोदंती 10 ग्राम, मेदा लकड़ी 10 ग्राम, और गाय का घी 30 ग्राम लें। पहले दो द्रव्यों को बारीक पीस लें। फिर इन्हें घी में मिलाकर थोड़ा गरम करके पसली पर लगाएँ। इससे पसली के दर्द से राहत मिलती है।
-----सिंगरफ 3 ग्राम, जायफल, लौंग, जावित्री, 6-6 ग्राम, मोम 12 ग्राम और देशी घी 60 ग्राम लें।
पहले सिंगरफ को खूब घोंटें, फिर लौंग, जावित्री, जायफल को महीन पीसकर रख लें। तत्पश्चात्‌ घी गर्म करके उसमें मोम मिला दें। जब दोनों घुल जाएँ तब उतारकर उक्त पिसी हुई औषधियों को डालकर खूब मिला दें। ठंडा होने पर यह वैसलीन के समान मलहम बन जाता है।
बच्चों अथवा बड़ों को तीव्र पसली के दर्द में हल्का गर्म करके लगाने से तुरंत दर्द बंद हो जाता है।
---- चंद्रामृत रस 4 रत्ती, श्रृंग भस्म 1 1/2 रत्ती, नौसादर 1 1/2 रत्ती, मल्लसिंदूर 1 रत्ती लेकर सबको एकसार करके मिला लें। फिर इसकी चार बराबर-बराबर पुड़िया बनाएँ। 1-1 पुड़िया 4-4 घंटे पर दें। यह पसली के दर्द (पार्श्वशूल) का सफल अनुभूत नुस्खा है। न्यूमोनिया की अवस्था में यह योग मिश्रण कफ को द्रव करके निकालता है। फेफड़ों की रोगावस्था को मृदु करके खाँसी कम करता है। इससे हृदय की वेदना कम हो जाती है।
---- गेहूं की रोटी को एक तरफ से सेंक ले और दूसरी तरफ से कच्ची ही रखें, फिर कच्चे भाग पर सरसों का गरम तेल मलकर उसे दर्द वाले हिस्से पर बांध दें। दर्द से राहत मिल जाएगी।
---- 10 ग्राम अजवाइन का तेल 10 ग्राम पिपरमेंट और 20 ग्राम कपूर तीनों को मिलाकर एक बोतल में भर दें। दर्द या कमरदर्द या पसलीदर्द, सिरदर्द आदि में तुरंत लाभ होगा |
----- ४०० ग्राम धतूरे के पत्‍तों का रस, १० ग्राम अफीम और ३ ग्राम सेंधा नमक। इन तीनों चीजों को एक साथ मिलाकर गाढ़ा गाढ़ा कर लें। दिन में तीन चार बार इसकी मालिश करने से दर्द में बहुत आराम मिलता है।
---- कमल ककड़ी के चूर्ण को दूध में उबालकर पीने से भयंकर से भयंकर दर्द में भी आराम मिलता है।
----- सोंठ और गोखरू बराबर मात्रा में लेकर उसका क्‍वाथ बनाकर सुबह शाम पीने से दर्द में आराम मिलता है।
----- सोंठ व अरंड मूल का क्‍वाथ बनाकर उसमें पिसी हुई हींग और काला नमक मिलाकर पीने से आराम मिलता है।
----- सौ ग्राम अजवायन का चूर्ण और सौ ग्राम गुड़ एक साथ मिलाकर किसी डिब्‍बे में रख लें और ५ – ५ ग्राम सुबह शाम खाएं। इससे कमर दर्द में आराम मिलता है तथा दर्द भी दूर हो जाता है।
-----पांच ग्राम खजूर को उबालकर उसमें २ ग्राम मेथी का चूर्ण डालकर रोज पीने से कमर दर्द में राहत मिलती है।